November 21st, 2011

berlin

... // "Albayan.ae", 20 ноября 2011 года


قدّم الروائي الفرنسي ايمانويل كارير، عددا من الأعمال الإبداعية التي جرى نقلها إلى أفلام سينمائية، لكنه يكتب اليوم سيرة حياة "ادوارد ليمونوف"، وحيث يقتصر العنوان على كلمة واحدة: ليمونوف.

فمن هو ليمونوف؟

يعرّفه المؤلف بالقول: "ليمونوف ليس أحد شخوص عمل روائي. إنه موجود. وأنا أعرفه. لقد كان مشاكسا مارقا- في أوكرانيا، ونجما محبوبا في الحقبة السوفييتية أثناء حكم ليونيد بريجنيف، ومتشردا كلوشار- وخادما لدى ملياردير في حي مانهاتن وكاتبا حداثيا في باريس وجنديا مرتزقا في حروب البلقان، والآن رئيس محبوب سابق لحزب الشباب الضائعين بروسيا ما بعد الشيوعية". ويعود المؤلف إلى عام 1983 عندما كان يعمل صحافيا في مجلة "تيليراما"، وكذلك في إحدى الإذاعات الحرة حيث دعا ادوارد ليمونوف للمشاركة في برنامج من موقعه كمؤلف لعمل يحمل عنوان: "يوميات فاشل". وبعد 20 سنة من ذلك التاريخ التقى ايمانويل كارير بليمونوف في موسكو أثناء مظاهرة مناهضة لفلاديمير بوتين. ما بين التاريخين كان الأول، مؤلف هذا الكتاب، قد أصبح كاتبا شهيرا متفرغا للكتابة بينما أصبح الثاني، ليمونوف، رئيسا للحزب القومي البلشفي، ذي التوجه الشيوعي القومي، الأمر الذي عرّضه للاعتقال والسجن.ما يعرفه القارئ هو أن ليمونوف كان يدعى "ادوارد سافنكو" في طفولته. وبعد 20 يوما من ولادته عام 1943 انهزمت جيوش هتلر أمام نهر الفولغا الروسي. وعندما بلغ العاشرة من العمر "ذرف الدموع مثل جميع زملائه في المدرسة" على موت ستالين، "أب الأمة"، كما كانوا يطلقون عليه. لقد كان "طفلا روسيا" بامتياز في القرن العشرين. لكنه عاش طيلة حياته في "مغامرة البحث عن حياته" وهذه المغامرة بالتحديد هي التي يرويها ايمانويل كارير.

السمة الأساسية التي يؤكد عليها المؤلف في شخصية "ليمونوف" هو أنه كان يريد أن "يتجاوز حدود الأمكنة "التي يعيش فيها"، كما "يتجاوز حدود الحقبة التي يعيش فيها" ولم يكن مهما بالنسبة له "السباق" الذي يفعل فيه ذلك ولا "القيم" التي يفرضها المجتمع. لقد بدأ حياته وترعرع على غرار أبناء الأحياء الشعبية الروسية في الحقبة السوفييتية ولم يكن ينسى أبدا أن "يحمل سكينا في جيبه".تلك النزعة "القتالية" قادته باستمرار نحو المناطق "الساخنة". هكذا كان "قريبا" من "كارادا جيك" المتهم بارتكاب جرائم حرب، وبالجنرال البولندي جيرينوفسكي، آخر قادة البلاد قبل سقوط الشيوعية، و"بعيدا" عن دعاة سلام من أمثال "زاخاروف". هكذا جذبته الحرب في صربيا.

نقرأ: "كان الصربيون العقلانيون يأسفون من الجنون الذي دفعهم إليه رئيسهم سلوبودان ميلوزيفتش (...). لكن الصربيين العقلانيين لم يكونوا يثيرون اهتمام ليمونوف ولم يكن يعرفهم ولا يرغب في معرفتهم. ما كان يريده هو الحرب".

ويشير ايمانويل كارير أنه إذا كان الشعور السائد لدى الروس هو الغبطة التي تقاسمتها الأغلبية عند سقوط النظام الشيوعي، فإن الأمر لم يكن كذلك بالنسبة له، أي ليمونوف الذي "لم يكن يبدو عليه أبدا أنه يتحدث مازحا أو غير جدّي عندما طالب بإعدام ميخائيل غورباتشوف بل وكان انهيار الاتحاد السوفييتي داعيا له كي يقوم برحلات طويلة إلى منطقة البلقان ولخوض الحرب إلى جانب قوات ميلوزفتش.

ويؤكد المؤلف القول: "لقد شوهد في فيلم وثائقي قدمته قناة بي.بي.سي البريطانية، وهو يطلق النار على سراييفو مع مباركة رادوفان كارادجيك، زعيم الصربيين البوسنيين، ومجرم الحرب المعروف". وكان ليمونوف قد عرف السجن عام 2001 لـ"أسباب غامضة تتعلق بتجارة الأسلحة ومحاولة القيام بانقلاب في كازخستان". ويومها جرى توقيع "عريضة" في باريس للمطالبة بالإفراج عنه.

ولا يتردد المؤلف في توصيف "ليمونوف" أنه كان بمثابة "أسطورة حيّة" حيث عاش "حياة مغامر كالتي يحلم فيها كل الشباب وهو في سن العشرين". لكنه استمر في عيش مثل ذلك "الحلم". هكذا لم يتردد في معارضة النظام الروسي ما بعد السوفييتي. وحافظ على روحه النضالية وهو في السجن الذي وضعه فيه رجال الكا.جي.بي. نقرأ:"لقد أثبت نزعته البطولية أثناء سجنه (...). ولم تصدر عنه أية شكوى ولم يتراجع عن أفكاره. ووجد الوقت الكافي كي يحرر سبعة أو ثمانية كتب بالإضافة إلى تقديم المساعدة لرقاق زنزانته الذي انتهى بهم الأمر إلى النظر إليه كرئيس عصابة وكنوع من القديسين بالوقت نفسه. ويوم إطلاق سراحه من السجن تشاجر حراسه من أجل الفوز بحمل حقيبته".

ويروي المؤلف أن ليمونوف طرح عليه السؤال التالي: "أمر غريب مع ذلك. لماذا تريد تحرير كتاب عنّي"؟ وكانت إجابته، بعد الإحراج المؤقت الذي أثاره طرح السؤال، بالقول: "لأنه هناك حياة مثيرة. حياة رومانسية، خطيرة. حياة خاطرت بالامتزاج مع التاريخ". عندما قال ليمونوف بابتسامة "لا معنى لها"، دون النظر إلى المؤلف: "حياة فاشلة، نعم".

شخصية مثيرة

يوضح الكتاب أن ليمونوف هو كاتب وخادم وذو شخصية ذات عجينة غريبة، لكن المعني ينظر إلى نفسه كـ"بطل"، كما يقول صاحب السيرة (المؤلف) الذي يقول إنه "يمتنع" عن إصدار حكم حول ذلك مؤكدا "أنها حياة خطيرة غامضة وجديرة برواية مغامرات حقيقية". ويضيف: "إنها حياة تقول، كما أعتقد، شيئا ما. ليس فقط على صاحبها ليمونوف وليس على روسيا فحسب، لكن على تاريخنا .

المؤلف في سطور

ايمانويل كارير، روائي وكاتب فرنسي، من مواليد عام 1956، قدم العديد من الأعمال من بينها: «الخصم»، التي جرى نقلها إلى شاشة السينمار "حياة آخرين غيري".

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Обращение Лимонова к народу Франции // 21 ноября 2011 года


via alaverin

Эдуард Лимонов

Обращение Лимонова к народу Франции

Народу Франции,
Президенту Французской Республики,
В Национальную Ассамблею Французской Республики
В Министерство Социальных проблем Французской Республики
от Савенко (Лимонова) Э.В.


Господин президент!
Уважаемые дамы и господа!

22 июля 1987 года я, Edward Savenko (dit Limonov) по моей просьбе получил французское гражданство, был натурализован, о чем в Journal Officiel № 174 от 30 июля 1987 года есть соответствующая публикация на странице 8553.

Ко времени получения гражданства Французской Республики я являлся лицом без гражданства, и уже проживал на территории Франции с 1980 года, т.е. семь лет.

Я благодарен Франции за то, что Ваша страна приняла меня на своей территории. Во Франции – традиционно уважающей писательский труд стране, – я стал профессиональным писателем, и ко времени переезда в страну моего рождения – Россию, в 1994 году, я опубликовал на французском языке 16 книг.

Сегодня я вынужден отказаться от гражданства Вашей страны, сохраняя по отношению к ней все наилучшие чувства благодарности и признательности.

Дело в том, что в ближайшие дни я намерен стать кандидатом в президенты Российской Федерации и потому мой моральный долг перед народом России, перед гражданами Российской Федерации заставляет меня поступить именно так.

Надеюсь, я буду Вами правильно понят.

Еще раз: моя глубокая благодарность Франции и её народу за то, что в тяжелые для меня годы скитаний в эмиграции я нашел на Вашей земле приют и внимание.

Edward Savenko (dit Limonov)
21 ноября 2011 года,
Москва

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